काशी विश्वनाथ मंदिर, वाराणसी, उत्तर प्रदेश

ऐसा कहा जाता है कि अंतरिक्षीय सृष्टि के तीन प्रकार होते हैं – सृष्टि, स्थिति और संहार| ये सभी एक अदृश्य शक्ति द्वारा निर्धारित होते हैं| इन शक्तियों को भगवान् विष्णु, भगवान् ब्रह्मा, व भगवान् शिव समझा जा सकता है| इन तीनों शक्तियों को त्रिमूर्ति अथवा त्रिदेव भी कहा जाता है| वाराणसी (काशी) को सभी नगरियों में सबसे उच्च माना जाता है और कहा जाता है कि यह नगरी भगवान् शिव के त्रिशूल पर विराजती है|

वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर की कहानी बहुत ही अद्भुत है| ऐसा कहा जाता है कि एक बार भगवान् शिव का मन एक से दो हो जाने का हुआ| उन्होंने अपने आप को दो भागों में विभक्त कर लिया| इनमें से एक भाग ‘शिव’ कहलाया और दूसरा भाग ‘शक्ति’ कहलाया| परंतु इस रूप में वे अपने माता-पिता को नहीं पा सके| उनका दुःख देखकर आकाश में आकाशवाणी हुई और शिव को तपस्या करने को कहा गया| तपस्या के लिए भगवान् शिव ने अपने हाथों से, पाँच कोस लंबी भूमि पर, काशी का निर्माण किया और यहाँ वे विश्वेश्वर की भांति स्थापित हुए| इस मंदिर में जो भी भक्त आता है उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है, यानि जन्म और मरण के चक्र से मुक्ति मिल जाती है| इसीलिए हर साल काशी विश्वनाथ मंदिर में असंख्य श्रद्धालु आते हैं| इस अद्भुत ज्योतिर्लिंग का दर्शन करके उनका जीवन धन्य हो जाता है|

 

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